Moral Stories in Hindi

भिखारी बना करोड़पति – Moral Stories in Hindi

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चंदन नाम है उसका, लेकिन कोई उसे इस नाम से नहीं पहचानता, लोगों के लिए वह एक लंगड़ा भिखारी है, जिसका चेहरा जले हुए के कारण बहुत ही भयानक दिखता है, और वह मॉल के बाहर भीख मांगता है, एक रुपए दे दो साहब भगवान के नाम पर दे दो, दूर हटो हटो मुझसे, चंदन को कोई पैसे देता है, तो कोई उसे देखकर नाक को भी चोड कर आगे बढ़ जाता,

तो कोइ उसे दुकार देता, कहते है की जीवन बड़ा जादूगर है, अगले पल यह कौन सा जादू दिखा कर आप को चकित कर देगा, यह किसी को नहीं पता, चंदन के जीवन में भी ऐसा ही कुछ घटा था, आज से डेढ़ साल पहले वह भी एक खुशहाल था, वह एक छोटा सा धागा चलाया करता था,

लेकिन एक शॉर्ट सर्किट में उसकी दुकान में आग लग गई, वह उस समय उस दुकान के अंदर था और आग लगते ही चिल्ला रहा था बचाओ-बचाओ दुकान में आग लग गई, मै अंदर फस गया हूं, बचाओ आग इतनी ज्यादा थी, की दुकान का सारा सामान जलकर खाक हो गया था, चंदन का भी एक पैर और पूरा चेहरा जल गया था,

लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया उसकी जान तो बच गई, लेकिन उसका एक पैर चला गया, उसके चेहरे पर जलने की कोई निशान होगी उसके दोस्तों रिश्तेदारों ने सभी ने उसका साथ छोड़ दिया, सिर्फ उसकी बड़ी माँ ही इस विपत्ति में उसके साथ थी, सारी पूंजी अस्पताल में लग गई थी, जब वह अस्पताल से बाहर आया तो कैसे भी करके पेट तो भरना था,

अपना भी और अपनी बीमार मां का भी, उसने कहीं जगह काम मांगा, लेकिन उसको किसी ने भी काम नहीं दिया, और इसलिए वह भीख मांगने लगा,

एक बार की बात है, जब वह भीख मांग कर अपनी कुटिया में पहुंचा, तो उसने देखा कि उसकी माँ, बीमारी में अचानक खास रही है, हंसते-हंसते उनके मुंह से खून निकल गया, चंदन बोल रहा था, अम्मा यह क्या हो गया है, पता नहीं बेटा केसे ये खांसी चल रही है, रुको में खांसी की दवा लेकर आता हूं,

Moral Stories in Hindi –

Moral Stories in Hindi

अरे छोड़ो ना बेटा ऐसा लगता है, कि बस यही आखरी दिन है, ऐसा मत बोलना तू ही तो, जीने का आखरी सहारा है, मेरा मां के मना करने पर भी चंदन दवाखाने पहुंच गया, जब दुकानदार ने देखा तो चंदन को फटकार दिया,

दुकानदार कह रहा था कि अरे अरे भागो यहां कई भीख मांगने की जगह है क्या चंदन बोला, अरे भाई मैं तो दवाई लेने आया हूं चंदन बोला अरे भैया मेरी मां को बहुत खांसी हो रही है, आज तो खांसी से खून भी निकल रहा है, कल मैं उन्हें पास के सरकारी हॉस्पिटल में ले जाऊंगा, आज तो कोई दवा दे दो,

जिससे खून बंद हो जाए, चंदन की जिद पर दुकानदार ने एक दवा की बोतल निकाल कर दे दी, और कहा अब 50 रू देदो, चंदन ने जेब में हाथ डाला और पैसे निकालने लगा, उसने देखा कि एक-एक सिक्का करके ₹15 ही हुए हैं, दुकानदार बोल रहा, अबे चल हट भिखारी कल के तेरी लॉटरी लग जाएगी, क्या मैं यहां धंधा करने बैठा हूं, पूरे पैसे दे और दवा ले जा और पैसे नहीं है,

तो चल भाग यहां से, पता नहीं कहां-कहां से चले आते है दिमाग खराब करने, चंदन निराश होकर अपने घर चला गया, रास्ते में हूं यही सोचता रहा कि अगर इंसान के पास पैसे नहीं है तो उसकी कोई कदर नहीं करता, इस तरह एक न एक दिन लोग मंदिर से भगवान की मूर्ति भी निकाल देंगे, और पैसों की पूजा करने लगेंगे, घर पर उसकी मां सो गई थी, पर वह सोते सोते भी खास रही थी,

चंदन सोच रहा है कि, हे ईश्वर मेरी मदद करिए, मुझसे मेरी मां की हालत नहीं देखी जाती, कुछ मदद करिए, ईश्वर कुछ मदद करिए अगले दिन चंदन अपनी मां को नजदीक के सरकारी हॉस्पिटल में ले गया,

डॉक्टरों ने जो मां की जांच की और चंदन को बताया तो चंदन के पैरों तले की जमीन खिसक गई, डॉक्टर ने बोला तुम्हारी मां को फेफड़ों की बीमारी है अगर 1 महीने के अंदर ऑपरेशन नहीं किया तो उनकी मौत हो सकती है, और बोला कि उनके ऑपरेशन के लिए ₹200000 की जरूरत है, और ऑपरेशन सरकारी हॉस्पिटल में नहीं होगा,

चंदन हॉस्पिटल से वापस लौट आया, लेकिन डॉक्टरों की बात से उसके मन में बुरे-बुरे ख्याल आने लगे, किसी अनहोनी की शंका और इतने पैसों जरूरत, यह सोच-सोचकर उस का मन डूबा जा रहा था, उसको पता था, कि भीख मांग-मांग कर इतने पैसों की आवश्यकता पूरी नहीं हो सकती,

वह भी 1 महीने के अंदर, ऊपर से किसी मेहरबान की नजर भी आज उसके ऊपर नहीं गई थी, तभी उसकी नजर सामने से आ रही एक बहुत ही सुंदर लड़की जिसका नाम शिवांगी था, उस पर गई उसे देखकर ही चंदन अपना हाथ फैला और कहा भगवान के नाम पर कुछ दे दिए मेम साहब, शिवांगी नीनी ₹500 निकालकर उसके कटोरी में डाल दिए,

चंदन ने पहली बार इतना बड़ा नोट अपने कटोरी में देखा और उसने शिवांगी को बोला, आप हमेशा खुश रहें, भगवान आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करें, शिवांगी ने उसे मुस्कुरा कर देखा, तभी उसके पास एक लंबी सी कार आई और शिवांगी उस कार में बैठ कर चली गई, शिवांगिनी के जाने के बाद चंदन उस नोट को देख रहा था,

तभी उस कटोरी में उसकी एक रिंग दिखी अरे यह अंगूठी कहां से आ गई, दिखने में तो काफी महंगी लग रही है, लगता है डायमंड की है कहीं अंगूठी उसमें हम सबकी तो नहीं है, जिसने भी अभी मुझे ₹500 दिए क्या करूं क्या करूं, कहीं भगवान ने यह अंगूठी मेरी मदद के लिए तो नहीं भेज दी,

इसी बीच क्या पता, मां के इलाज का खर्चा निकल आए, हां मै बेच देता हूं, यह सोचकर उस अंगूठी को लेकर, चंदन एक सुनार के पास गया, तभी उसकी अंतरात्मा बोली कि ऐसा ना करें, यह तो चोरी हुई ना, माना माँ बीमार है, लेकिन किस तरह किसी और की अंगूठी बेचकर मां का इलाज ठीक नहीं होगा,

वो वहां से निकल आया और उसमें उन सब को ढूंढने लगा, पर इतने बड़े शहर में क्या, मैं उसमें उन मेमसाब को ढूंढ पाऊंगा, उनको ढूंढना इतना आसान तो नहीं था, वह बेचारा हर दिन हर किसी से पूछता और हर चेहरे में उसमें मेमसाब को ढूंढने की कोशिश करता, लेकिन वह नहीं मिली,

इस तरह 10 दिन बीत गए, एक तो मां की इलाज की फिक्र और दूसरी तरफ से मेंम को ढूंढना, यह सोच-सोच कर चंदन कहीं रातें नहीं सोया था, लेकिन 11 दिन चंदन की नजर उस मेमसाब पर पड़ी, वह अपनी गाड़ी से निकल रही थी, चंदन उस मेम साब का पीछा करने के लिए उसके पीछे-पीछे चल रहा था,

कुछ ही दूरी पर वह कार एक बड़े से अस्पताल के पास जाकर खड़ी हुई, उसमें से वह उतरकर, उस हॉस्पिटल में चली गई, चंदन भी उसके पीछे-पीछे हॉस्पिटल में चला गया, वह उसको आवाज लगा रहा था, मेमसाहब मेमसाहब, शिवांगी ने उसे पलट कर देखा, शिवांगी उसे पलट कर देखा और बोला अरे मैंने शायद तुम्हें कहीं देखा है,

मै भीख मांगता हूं, 10 दिन पहले आपने मुझे ₹500 दिए थे, पिछले 10 दिन से मैं आपको ढूंढ रहा हूं, आप की चीज मेरे पास है, चंदन ने वह अंगूठी शिवांगी को दे दी,

शिवांगी ने अंगूठी लेकर बोला ओ माय गॉड, मैं इसको लेकर बहुत सोच रही थी, तुम्हें पता है यह अंगूठी मेरी स्मांवर्गवासी माँ की है, उन्होंने यह अंगूठी मुझे अपनी मौत से पहले दी थी, यह मेरे दिल के बहुत करीब है,

चंदन – यह तो मुझे नहीं पता मैम साहब लेकिन यह आपकी अमानत है, यह मुझे पता है यह कहकर चंदन वहां से जाने लगा, तब शिवांगी ने उससे कहा मैंने तो इसे अंगूठी को पाने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, काश सबकी सोच तुम्हारी तरह हो, इससे जिसकी जो पसंद है, उसके के पास रहेगी और अगर खो जाए तो तुम्हारे जैसा उसको वापस लौटा देगा,

उसकी बात सुनकर चंदन फूट-फूट कर रोने लगा, तब से शिवांगी ने पूछा तो चंदन ने शुरू से अंत तक की कहानी बताई, शिवांगी ने बोला चंदन, तूमने मेरी मां की निशानी मुझे पहुंचाई, मैं तुम्हारी मां को कुछ नहीं होने दूंगी,

इसी अस्पताल में उनका इलाज होगा और मैं करूंगी उनका इलाज डॉक्टर शिवांगी करेगी उनका इलाज चंदन बोला, क्या आप डॉक्टर हैं, हां मैं इस अस्पताल में नौकरी करती हूं और मैं मालिक से कहकर तुम्हारे लिए कुछ काम का बोलूंगी

आज के बाद तुम्हें भीख मांगने की कोई जरूरत नहीं है, तुम इस अस्पताल में अपना एक कैंटीन शुरू करो, चंदन की मां का इलाज हो गया, सफलता पूर्वक और चंदन उस हॉस्पिटल में अपना कैंटीन चलाने लगा, उसने जी तोड़ मेहनत की और अच्छी आमदनी हो गई तब उसने उस शहर के एक पुराने होटल को खरीद लिया,

होटल अच्छी तरह से चल रहा था, इस तरह उसने उस शहर में अपने पांच होटल और ले लिए, पर उसका मकसद तो कुछ और ही था धीरे-धीरे उसने पैसे इकट्ठा किए और अपनी मां के नाम से एक हॉस्पिटल बनवाया, डॉक्टर शिवांगी आज उस हॉस्पिटल की डायरेक्टर है, उस हॉस्पिटल की माध्यम से चंदन की कोशिश यह है, कि पैसे के अभाव में गरीब का इलाज करो कि और किसी से उसकी प्यारी चीज कभी ना खोए,

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Thank You, Everyone..!!

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