Love Story in Hindi – पहला प्यार पार्ट-1

पहला प्यार पार्ट-1

Love Story in Hindi by Neelesh Misra – नमस्कार दोस्तों मैं आशा करता हु कि आप सभी बहुत अच्छे होंगे, आज मैं आपके सामने लेकर आया हुं, Love Story in Hindi, तो आइये देखते है कि क्या होता है – आज सोमवार है ना, आज के दिन ही, मैं उससे पहली बार मिली थी,

लोग कहते हैं कि पहला प्यार कभी नहीं बोलते हैं, मुझे अच्छी तरह याद है कि उस दिन मैंने क्या पहना था, तुमने क्या पहना था, उसदिन मेरी गाड़ी में पेट्रोल नहीं था और मैं उसे धखेल कर पेट्रोल पंप तक ले जा रही थी, हम कहां किस दुकान के सामने खड़े थे, और मैं उसे चुपके से जासूस की तरह देख रही थी,

मैं उससे यह भी देख रही थी, कि कौन हमें खिड़कियों से झांकता, वह खिड़कियों से देख रहा है, तब आजकल जैसे थोड़ी था, तब छोटे छोटे शहर में, आज कल की तरह लड़कियों के बॉयफ्रेंड नहीं होते थे,

Best Love Story in Hindi –

घर में पापा और भाई स्कूल में टीचर बस यही हमारी जिंदगी के मुख्य पुरुष किरदार हुआ करते थे, और भाई अगर मेरे भाई की तरह हट्टा कट्टा और लड़ाकू निकला तो बस, वो तो शुक्र है की भैया उस दिन मामा जी के यहां गए हुए थे, मम्मी ने उस दिन भाई को मामा जी के यहां भेजा था,

भाई दूज का टीका लेकर सब याद है मुझको, एक-एक चीज उस दिन की सर्दी की दोपहर, उनके दस्तानों में ठिठुरते हुए मेरे हाथों के, जब मैंने पहली बार उससे बात की थी, तो वह सारी आवाजें जिसमें मेरा पूरा मोहल्ला लिपटा हुआ था, कोई सुने या ना सुने लेकिन कवियों की तरह जिद पर उतारू है,

कि पूरी कविता सुना कर ही मानेगा दूध वाला, अपने खाली के लेकर दूध के साइकिल लेकर चर्चा से आवाज निकलता हुआ कहीं दूर खिड़की से किसी नाराज मां की आवाज, पप्पू तूने अभी तक नहीं नहाया गंदे कहीं के, स्कूल से लौटते हुए बच्चों की चिल-चिलाहत और अपने ही किसी चुटकुले पर जोर की हंसी,

और इन सब के बीच इन सारी आवाजों के बीच उस आवाज की कोलाहल, जो मेरी जिंदगी का रुख बदलने वाली थी, मैं आपका दोस्त बनना चाहता हूं, यूनिवर्सिटी में आशिक मिजाज लड़के थे, पर सायद मेरे भाई के खौफ और मेरे पढ़ाकू शोक की वजह से किसी की हिम्मत नहीं हुई थी,

कि कभी ऐसा वैसा कुछ कहें सब सहेलियां चुप-चुप करो, पता नहीं क्या खिलखिलाती रहती थी, और मैं पहुंचता तो कहती थी तुम्हारे किसी मतलब का नहीं है, बड़ी बेइज्जती लगती थी, कभी-कभी मैं अपनी शादी,

लेकिन कुछ दुनिया में जी रहा की एक दिन अचानक साइकिल बरात एक लड़की ने मेरा रास्ता रोक कर कहा, हाय मेरा नाम शिव है, इसी कॉलोनी में रहता हूं, हम लोग अभी-अभी यहां पर रहने आए हैं, आपके शहर में अकेला हूं, मेरा कोई दोस्त नहीं है, यहां पर आप मेरी दोस्त बनेगी, बेशर्मी बेबाकी मासूमियत ईमानदारी बदतमीजी, अब बताइए क्या कहूं इसे, जिससे उसे मुझे देखने के लिए ऐसे बात करने के लिए मेरा रास्ता रोकने के लिए इजाजत की जरूरत ही नहीं थी,

एक अनजान लड़का एक सेकंड में मेरे ऊपर इतना अधिकार जमा रहा था, उसका नाम शिव मेरा शिवांगी अजीब इत्तेफाक है ना, मुझसे उम्र में दो-तीन साल छोटा लग रहा था मैंने कहा आप अपने किसी हम उम्र से दोस्ती क्यों नहीं कर लेते, अच्छा मुझे नहीं पता था,

कि आप के पोते भी हैं, मैंने कहा जी आप की तुलना में तुम्हें जरूर दादी हूं, यूनिवर्सिटी में पढ़ती हूं, मास्टर ज्वाइन किया है, अभी-वह कुछ नहीं बोला, मैंने कहा वह पिंटू है ना वह तेरे घर के सामने रहती है, उससे दोस्ती कर लीजिए मैं बात करती हूं, शिव बोला देखिए आपको दोस्ती नहीं करनी है,

तो साफ मना कर दीजिए ना, यह बहाने कम उम्र के दावे, उसने कहा जानता हूं, मैं पिंटू को लेकिन मुझे इंटेलिजेंट लड़कियां पसंद है, जरूरी नहीं कि हमेशा खूबसूरत लड़की अच्छी लगी, लेकिन लगता है कि आपमें दोनों हैं, तारीफ दिल को हमेशा खुश कर जाती है, लेकिन मैंने मन में कड़ा किया और कहा मैं दोस्ती नहीं कर सकती, मेरे भाई साहब लड़के लड़कियों की दोस्ती में भरोसा नहीं रखते, और वैसे भी मेरे पास सबके लिए वक्त नहीं है,

आई एम सॉरी, मैंने उसकी दोस्ती ठुकरा दी थी, वह कुछ पल खड़ा रहा और देखता रहा कि आखरी ना नहीं है यह पहली हां आए वह जानता था, कि मैं चाहती तो हमेशा की तरह अपने भाई से शिकायत कर सकती थी, न जाने क्या था,

उस रात में जिस दिन मैंने अपने भाई को नहीं अपनी छोटी बहन को बताया, न जाने क्यों मुझे से देख रहा था, शायद मैंने बिंदी लगा रखी थी, इसलिए या अच्छी दिखती हूं, इसलिए पहली बार किसी ने मुझे खूबसूरत होने का एहसास कराया था, अगले दिन फिर वह मुझे चौक पर दिखा, हाथों में कॉपी और किताबें थी,

मैं भी कुछ बहाना करके सामने वाली दुकान में से सब्जियां खरीदने लगी, मैंने पलट कर आंखों से गौर से उसे फिर से देखा, उसमें कुछ तो अलग था, शरारत और सादगी और उसका नाम शिव मेरा शिवांगी अजीब इत्तेफाक था ना, कमबख्त अगले दिन पेट्रोल पंप के सामने ही मिल गया, बोला हेलो शिवांगी, मेरे मन के सॉफ्टवेयर भरे गीत सुनाई दिये, पुकारो मुझे नाम लेकर, पुकारो मुझे तुमसे अपनी खबर मिल रही है,

फिर मुझे अपना लड़ाकू भाई याद आ गया, उन दिनों फेसबुक तो था नहीं, फ्रेंड रिक्वेस्ट आमने सामने आई, मैंने उस पर नॉट नाउ का बटन दबा दिया था, मेरे खानदान के हिसाब से लड़कों से दोस्ती प्यार ये सब मन था, (Love Story in Hindi) मैंने कहा हेलो, उसने कहा, तो फिर मैंने कहा फुर, लेकिन वह दिमाग से फुर होने का नाम ही नहीं ले रहा था, वह दिन फिर से मुझे सब्जी बाजार में मिल गया, सब्जी लेने के बहाने मेरे पास आकर खड़ा रह गया और चतुराई तो देखो सब्जियों के भाव पूछने लगा,

वह लड़का चाहे उसने अपनी लाइफ में एक आलू तक नहीं खरीदा हो वह दुकानदार से कटहल पर मूल भाव कर रहा था, जब दुकानदार किसी और से पैसे ले रहा था, शिव फट से मेरी ओर मुड़ा और बोला तो फिर, पापा से मेरी खूब पटती थी, हमेशा से मेरे बेस्ट फ्रेंड रहे है, कमाल के आदमी है, इतने मॉडर्न परिवेश में पला बढ़ा इंसान, इतनी खुली सोच को हो सकता है,

कि मैं सोच भी नहीं सकती थी, लेकिन शायद वो जानते थे कि, जिस दिन मां-बाप, अपने बच्चों पर भरोसा करना शुरू कर देते हैं, उस दिन वह अब उनके सबसे अच्छे दोस्त बन जाते हैं, पापा मेरे बचपन से सबसे अच्छे दोस्त हैं, मतलब ना होते हुए भी अपने यूनिवर्सिटी में प्यार का पत्र लेकर, आगे पीछे घूमने वाले लड़कों के किस्से में अपने पापा को सुनाया करती थी, मजे की बात यह थी कि मैंने उनको, अब तक शिव के बारे में नहीं बताया था,

ऐसा नहीं था कि मैं पापा से कुछ छुपाना चाहती थी, और मैं आपको बताऊं तो कैसे बताऊं और क्या बताऊं, कि कोई मिला, उसने प्रपोज किया मैंने नो किया, और फाइल क्लोज, लेकिन यह फाइल क्लोज नहीं हो पा रही थी, और मैं समझ नहीं पा रही थी, कि इसके कवर पर क्या लिखा जाए, एक दिन पापा दो कप चाय लेकर आए, एक कब मुझे दी मैंने कहा थैंकयू पापा, फिर शरारती आदत में बोले, बेटा दोस्तों से राज छुपाया  नहीं करते,

यह शिव भाई साहब वाला क्माया मामला है, मेरी चुगल खोर बहन पिटेगी मुझसे, मैंने पापा को पूरी कहानी सुनाई, शुरू से लेकर की, एक लड़का मुझे मिला, मुझसे दोस्ती करना चाहा, मैंने मना कर दिया, पापा बोले तुमने झूठ क्यों बोला, मैं मना करता क्या कि मुझे कोई ऐतराज है, मैं पापा को बता ही नहीं पाई थी, कि मन में कहीं ना कहीं,

तो वह दोस्ती करना चाहता था, मुझे तो उससे पहली नजर में पहला प्यार हो गया था, मैं सड़क पर खड़े उस छोटे-से लम्हे में, जान गई थी, कि उसे दोस्ती चाहिए थी, और मुझे प्यार फिर हमारे बीच उम्र का फासला भी तो था, क्यों लाइफ इतनी कॉम्प्लीमेंट करनी थी, अच्छा माली इस पौधे को जड़ से ही काट देता है और मुझको काटने का बहुत शौक है,

मैंने हंसकर पापा को टाल दिया, बोले अच्छा हुआ दोस्ती का सिलसिला चालू नहीं हुआ, आज मकान मालिक आया था, कह रहे थे कि उनकी बेटी अमेरिका से पढ़ कर आ रही थी, तो उनको बढ़ाकर चाहिए, हमें यह मकान खाली करना पड़ेगा और कहीं और जाना होगा कितनी बेवकूफ हूं मैं हमें एक जाने पहचाने मोहल्ले और एक लड़की को छोड़ कर जा रही थी,

पर पर क्यों मेरी आंखों में आंसू आ गए थे उस रात खड़े-खड़े रिश्ता तो था नहीं तो टूटने का क्या गम है, वह तो दोस्त भी नहीं था, प्यार से बिछड़ जाने का गम क्यों? प्यार क्या, तुम तो दोस्ती भी करना नहीं चाहती थी ना शिवांगिनी और वह निकम्मा प्यार नहीं बस दोस्ती करना चाहता था,

तो अचानक से डायरी लिखना क्यों शुरू कर दिया जब सब के कहने पर कैंडी की शादी में लेडीस डांस डांस करने के लिए शुरू हुई थी, तो बस उसी का ख्याल क्यों आया था, पापा ने जल्दी किराए का घर ढूंढ लिया, बड़ा सा बड़ा बरांडा था वहां पर उसके आगे ठीक-ठाक साइज का लोन भी था, (Love Story in Hindi)

मुझे पहली बार अपना कमरा भि मिलने वाला था खुली खुली कॉलोनी में था हर मायने में अपने मोहल्ले से अच्छा तुम्हें खुश क्यों नहीं थी, दो चार बार मिला लड़का इतना इंपॉर्टेंट कैसे हो सकता है, मैं एक समझदारी का पुलिंदा यह क्या बेवकूफी कर रही थी,

मुझे बीएसी करनी थी, आगे कहीं नौकरी करनी थी टीनएज वाले बकवास चौक में उलझती जा रही थी, और क्या कह रही है कि वह ठीक ठाक लड़का था जिसे मुझे छोड़ने का बहुत गम हो रहा था हम लड़कियां बिना मैं पुराना घर छोड़ के समय कैसे रोए, जैसे बेटियां ससुराल जाते टाइम रोटी है, पापा की भी आंखें नम थी,

लेकिन आंख में कंकर हैं हम दोनों की आंसुओं के कारण कुछ अलग थी उनके लिए यह घर उनके परिवार का एक हिस्सा था 25 साल पहले उन्होंने अपनी एक छोटी सी नौकरी में एक बड़ा सा सपना देखा ओर यह बड़ा सा घर ले लिया था वह घर जम सब रहते थे,

पापा ने उन दिनों अपनी हैसियत से ज्यादा पांव फैला कर यह घर लिया था पापा चाहते थे कि मेरी मां को कोई तकलीफ ना हो घर का एक बरांडा हो बरांडे में सभी मिलकर एक चाय तो पी सकते हैं जब मैं घर का काम करते-करते थक जाए तो अपनी फटी हुई एड़ियों से धूप मैं मालिश तो कर सके पापा चाहते थे कि मैं यहीं पर अपनी सहेलियों से बातें करें,

दिनभर इसी बरामदे में हमारे लिए स्वेटर भुने, यही छोटी-छोटी बातें तो प्यार होती है ना, लड़कियां सबसे ज्यादा उस को पसंद करती है, जिसमें उन्हें अपने पिता की छवि दिखती है, शायद सड़क पर जिसने मुझसे बात की थी, शायद वही लड़का था, लेकिन अब देर हो चुकी थी, मैं दूर जा रही थी, और वह कहीं गुम हो चुका था,

फिर वह दिखा नहीं, हमने वह कॉलोनी छोड़ दी थी, पर जब भी जाना होता तो मेरी आंखें उसको ढूंढा करती थी, मैं खुद को याद दिला दी थी, कि उसका नाम शिव मेरा नाम शिवांगी यह महेश जी एक इत्तेफाक था, एक फिल्मी इत्तेफाक,

लेकिन जिंदगी कोई फिल्म थोड़ी है, नया घर धीरे-धीरे अच्छा लगने लगा था, मैंने अपना कमरा बड़ी प्यार से सजाया था, घर के अंदर एक और घर था मेरा जिसमे मेरी एक पहचान थी, मां और मैं यहां छुट्टी के दिन घंटों बिता करते थे, कभी पापा यहां दफ्तर से लौटते समय मूंगफली लाते और बस सब मेरे कमरे में बैठकर गप्पे मारते और चाय पीते, यूनिवर्सिटी में भी मुझे प्रेम पत्र मिलना चालू था, मेरी प्यारी बहन को भी मोहब्बत के प्रपोजल आने लगे थे, (Love Story in Hindi)

खानदान वाले तो बरसों से कह रहे थे कि लड़कियां बड़ी हो गई है कब तक घर में बिठाए रखोगे, लेकिन और पापाओं की तरह मेरे पापा शादी करने के लिए लड़की देखने के लिए कभी ज़िद नहीं करते थे, कि मैं अपने सपनों को जी लू, मन करे तब शादी करूं, लेकिन वह भी असली दुनिया में ही रहते थे,

तो 1 दिन हम सब रजाई में बैठे थे लूडो खेल रहे थे, पापा मम्मी ने एक-दूसरे को देखा वह शायद रिहर्सल करके आए थे, पापा ने कहा बेटा तुम्हारी मम्मी तुमसे कुछ कहना चाहती है, मम्मी ने गला साफ किया, वह कहने वाले थे जिससे पहले ही मैंने कहा दिया,

पापा मम्मी मुझसे जबरदस्ती मत करना, मुझे पता है तुम करोगे भी नहीं, जिस लड़के की तुम बात करने वाले हो, उससे मैं मिलूंगी पर मुझे शादी के सुपर मार्केट में खड़ा मत करना पापा मम्मी बड़े खुश, पापा ने कहा मान गई भाई मान गई पापा ने आगे बढ़कर मेरा माथा चूम लिया, 2 सेकंड बाद बत्ती चली गई दरवाजे पर घंटी बजी, मैं आलस में जलाते हुए गर्म रजाई से उठी बालकनी में जाकर देखा, तो अपनी साइकिल से उतरते हुए और उम्मीद की नजरों से देखते हुए शिव खड़ा था,

उम्मीद करता हूँ आपको यह स्टोरी (Love Story in Hindi – पहला प्यार पार्ट-1) पसंद आई होगी, अगर आपको स्टोरी पसंद आई हो, तो स्टोरी को Share कर देना, और Comment करके जरूर बताना की यह स्टोरी आप को कैसी लगी? और क्या आप इसका पार्ट-2 भी पड़ना चाहते है?

Thank You, Everyone..!!

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